किसी ने बड़े कमाल की बात कही है अगर रिश्तो की गांठे खुल सकती है। तो उन रिश्तो के धागे पर कैच नहीं चलाते।। नमस्ते दोस्तों मैं हूं Rjvijay एक छोटी सी कहानी यह कहानी है महाभारत के वक्त की जब महाभारत का युद्ध चल रहा था। कौरवों की तरफ से पितामा भीष्म युद्ध लड़ रहे थे। पांडवों की तरफ से सात भगवान श्री कृष्ण दे रहे थे। कौरवों के सेना में हाहाकार मच जाता था जब अर्जुन का बाढ़ चलता था। रोज शाम में जब युद्ध खत्म होता था, तो सब अपने अपने शिविर में लौट आते थे, पितामह भीष्म ने भी अपने शिविर पहुंचते थे। और जब भी पहुंचते थे वहां दुर्योधन उन पर आरोप लगाने के लिए तैयार रहता था जैसे ही भीष्म वहां पहुंचते थे दुर्योधन कहता था । पितामा आप मुझे लगता है। पूरी ताकत से लड़ते ही नहीं हैं । ऐसा लगता है आप हमारी तरफ से नहीं बल्कि पांडवों के तरफ से युद्ध में लड़ रहे हैं। आप पांडवों का वध क्यों नहीं कर रहे हैं। रोज शाम में शिविर में पहुंचते ही वो यही आरोप लगाता था। एक दिन पितामा भीष्म वहां पहुंचे दुर्योधन वहां बैठा हुआ था । वाहा पहुंचते ही दुर्योधन फिर से आरोप लगा दिया । और पितामह भीष्म...