किसी ने कमाल की बात कही है
की अपने जीवन को ऊपरवाले को सौप दे
क्योंकि आप जीवन भर में कर सकते है ।
उतना तो वो एक पल में कर सकता है ।।
नमस्ते दोस्तों मेरा नाम है rj vijay
आपके लिए एक छोटी सी कहानी यह कहानी महाभारत की युद्ध की युद्ध के प्रारंभ होने से पहले युद्धभूमि को तैयार किया जा रहा था कुरुक्षेत्र की भूमि को समतल बनाया जा रहा था।
पेड़ों को हटाया जा रहा था उसी युद्ध भूमि का मुआयना करने के लिए 1 दिन पहले निरीक्षण करने के लिए भगवान श्री कृष्ण और उनके मित्र धनुर्धर अर्जुन पहुंचे।
वो मुआयना कर रहे थे देख रहे थे तैयारी किस तरीके से चल रही है। तभी एक चिड़िया उड़ती उड़ती आई और भगवान श्री कृष्ण के पास आकर के बोली भगवान मुझसे क्या गलती हो गई?
मेरी दुनिया आपने उजाड़ दी यहां युद्ध भूमि को तैयार किया जा रहा है पेड़ों को गिराया जा रहे हैं।
एक हाथी में आकर के मेरा पेड़ गिरा दिया मेरा घोंसला उस पर था। घोंसला गिर करके जमीन पर आ गया मेरे नन्हे नन्हे बच्चे है ।
हमारी जान बचा लीजिए भगवान अब सब कुछ आप के हवाले हैं।
भगवान श्री कृष्ण ने कहा की मैं इसमें क्या कर सकता हूं । मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकता। ये तो नियति का पहिया है।
समय का पहिया है घूमता चला जाता है । इसमें मैं क्या कर सकता हूं बताओ। वो चिड़िया रोआसी हो करके बोली।
भगवान मुझे बस एक इजाजत दे दीजिए भगवान ने बोला बोलो क्या क्या पूछना है क्या इजाजत चाहिए।
तो उस चिड़िया ने कहा भगवान मैं आप पर विश्वास तो कर सकती हूंना भगवान ने हामी भरी।
अगले दिन युद्ध शुरू हुआ और युद्ध की शुरुआत से पहले भगवान श्री कृष्ण ने अपने दोस्त अर्जुन से कहा अपने मित्र से कहा मुझे अपना धनुष और एक तीर दे दो एक बाड़ दे दो।
अर्जुन ने अपना धनुष अपने से पहले पूछा केशव आपने तो प्रतिज्ञा ली थी । आप शस्त्र नहीं उठाएंगे।
क्योंकि अर्जुन चौक गया भगवान को शस्त्र क्यों उठाना पड़ रहा है। ऐसा क्या हो गया। तो भगवान श्री कृष्ण ने कहा।
वो सामने हाथ देख रहे हो उस हाथी ने उस चिड़िया का घोंसला गिराया । उस पेड़ को गिराया नष्ट कर दिया।
जिस पर उस चिड़िया का घोंसला था। मुझे कुछ तो करना पड़ेगा।
अर्जुन समझ गया ,भगवान श्री कृष्ण ने एक धनुष लिया तीर छोड़ा लेकिन ये क्या वो तीर जाकर के हाथी को लगा ही नहीं उसके गले में जो घंटी लटकी थी उस पर जाकर के लगा और वह घंटी नीचे जमीन पर गिर गई।
अर्जुन हंसने लगा और कहने लगा माधव आप से नहीं हो पाया अब मुझे मौका दीजिए। 1 मिनट में उस हाथी को नष्ट कर दूंगा ,खत्म कर दूंगा।
भगवान ने कहा नहीं नहीं हो गया बस इतना ही काफी था। अर्जुन ने भी ज्यादा सवाल जवाब नहीं किया।
18 दिन तक युद्ध चला और उसके बाद में जब पांडवों की जीत हुई तो एक बार फिर से उस मैदान में उस मैदान को साफ किया जा रहा था।
युद्ध के बाद में नुकसान हुआ था बहुत सारा समान गिरा पड़ा था। साफ सफाई चल रही थी।
भगवान श्री कृष्ण ने एक बार फिर से अपने दोस्त अपने मित्र अर्जुन के साथ में उसी भूमि का मुआयना करने के लिए निकले और अर्जुन से कहा एक काम कीजिए।
मेरे सखा रथ से उतरिए गा आज जाकर के आज जो वो घंटी रखी है उसको हटा दीजिएगा ।
अर्जुन चौक गया कि हमने युद्ध जीत लिया है। हम इतने महान बन चुके हैं और ये मुझे एक घंटी उठाने के लिए, युद्ध भूमि की साफ-सफाई करने के लिए कह रहे हैं।
लेकिन जानता था भगवान है कुछ भी कह सकते हैं।
रथ से नीचे उतरा जाकर के उस घंटी को उठाया साइड किया और जैसे ही उस घंटी को उठाया वैसे ही उसके नीचे से नन्हे नन्हे बच्चे चिड़िया के फड़फड़ते हुए उड़ान भर लिए उन्होंने उड़ गए ।
अर्जुन की आंखें नम हो गई उस घंटी के नीचे था वो घोंसला उस चिड़िया का जो मदद मांगने आई थी।
18 दिन के युद्ध में वो चिड़िया और उसके बच्चे सुरक्षित रहे क्योंकि घंटी वहां पर उनका सुरक्षा कवच बनकर आ चुकी थी।
चिड़िया ने शुरुआत में ये कहा था कि क्या मैं भगवान आप पर विश्वास तो कर सकती हूं ना और भगवान ने हामी भरी थी।
कहानी बहुत छोटी है लेकिन हमें सिखाती है कि दुनिया में या हमारे सामने जो परिस्थिति आ जाए एक काम कीजिएगा । अपने जीवन को ऊपर वाले को सौप दीजिएगा । क्योंकि आप जीवन भर में जितना कर सकते हैं उससे कहीं ज्यादा तो वे एक पल में कर सकता है।
Rjvijay इसीलिए आपसे हमेशा कहता है हमेशा आप से कहता हूं कि ऊपर वाले के आशीर्वाद के साथ अपनी सच्ची मेहनत के साथ और अपनी फैमिली के प्यार के साथ।
कर दिखाओ कुछ ऐसा।
दुनिया करना चाहे आपके जैसा।।
By rjvijay

Comments
Post a Comment